ओ वुमनिया
चल बदलें दुनिया
है गन्दगी दिमाक में कुछ
कुछ गन्दी है ये दुनिया
ओ वुमनिया
चल बदलें दुनिया
चल बदलें दुनिया
है गन्दगी दिमाक में कुछ
कुछ गन्दी है ये दुनिया
ओ वुमनिया
चल बदलें दुनिया
पहचान तेरी कुछ है नहीं
बस ज़िस्म का सामान है
बरसो बरस बीत गए
बस तेरी यही पहचान है
अब बस हुआ
तू भूल जा ए सारी बतिया
कुछ ऐसा कर की
बदल जाए सारी रितिया
ओ वुमनिया
चल बदलें दुनिया
बस ज़िस्म का सामान है
बरसो बरस बीत गए
बस तेरी यही पहचान है
अब बस हुआ
तू भूल जा ए सारी बतिया
कुछ ऐसा कर की
बदल जाए सारी रितिया
ओ वुमनिया
चल बदलें दुनिया
कहने को ये दुनिया
कहती है तुझे मइया
जग जननी दुर्गा सी
होती है तेरी बतिया
बस बतिया से संतुष्ट ना हो
मान भी शक्तिशालिया
कुछ ऐसा कर की
बदल जाए सारी रितिया
ओ वुमनिया
चल बदलें दुनिया
कहती है तुझे मइया
जग जननी दुर्गा सी
होती है तेरी बतिया
बस बतिया से संतुष्ट ना हो
मान भी शक्तिशालिया
कुछ ऐसा कर की
बदल जाए सारी रितिया
ओ वुमनिया
चल बदलें दुनिया
तुमने भी अपनी शक्ति का
गलत लगा लिया अनुमान
नश्वरता पर तूने भी
कर लिया गुमान
पहचान खुद की असलियत
तोड़ दे सारी बेड़ियाँ
कुछ ऐसा कर की
बदल जाए सारी रितिया
ओ वुमनिया
गलत लगा लिया अनुमान
नश्वरता पर तूने भी
कर लिया गुमान
पहचान खुद की असलियत
तोड़ दे सारी बेड़ियाँ
कुछ ऐसा कर की
बदल जाए सारी रितिया
ओ वुमनिया
चल बदलें दुनिया
पहचान तू कोई वस्तु नहीं
चाह नहीं कोई धातु नहीं
मन कर दे तुझे छूने का
ऐसी कोई तू मूर्ति नहीं
तुझमें भी चेतना है
ये समझा दे सारी बतिया
कुछ ऐसा कर की
बदल जाए सारी रितिया
ओ वुमनिया
चल बदलें दुनिया
चाह नहीं कोई धातु नहीं
मन कर दे तुझे छूने का
ऐसी कोई तू मूर्ति नहीं
तुझमें भी चेतना है
ये समझा दे सारी बतिया
कुछ ऐसा कर की
बदल जाए सारी रितिया
ओ वुमनिया
चल बदलें दुनिया
औरत को औरत बनाएं
समझ को उसकी सुदृढ़ बनाएं
खुद ही खुद की दुश्मन न बने
ऐसा कोई संकल्प दिलाएं
ऐसा अगर हो जाए
तो बदल जाए सारी दुनिया
कुछ ऐसा कर की
बदल जाए सारी रितिया
ओ वुमनिया
चल बदलें दुनिया
समझ को उसकी सुदृढ़ बनाएं
खुद ही खुद की दुश्मन न बने
ऐसा कोई संकल्प दिलाएं
ऐसा अगर हो जाए
तो बदल जाए सारी दुनिया
कुछ ऐसा कर की
बदल जाए सारी रितिया
ओ वुमनिया
चल बदलें दुनिया
बेड़ियाँ तो तूने फेक दी
सीख भी लो खुद को बचाना
दरिंदे यहाँ खुले घूम रहे
सीखती दुर्गा का रूप दिखाना
मेनका रम्भा जो बन बैठी
तो बनती महाकाली भी
जो रूप दिखाती यौवन का
तो करती भी संहार मर्दानी सी
पर तू कहाँ कमजोर हुई
क्यूँ दिखती नहीं मर्दनिया
अब तू कुछ ऐसा कर की
बदल जाए सारी रितिया
ओ वुमनिया
चल बदलें दुनिया
सीख भी लो खुद को बचाना
दरिंदे यहाँ खुले घूम रहे
सीखती दुर्गा का रूप दिखाना
मेनका रम्भा जो बन बैठी
तो बनती महाकाली भी
जो रूप दिखाती यौवन का
तो करती भी संहार मर्दानी सी
पर तू कहाँ कमजोर हुई
क्यूँ दिखती नहीं मर्दनिया
अब तू कुछ ऐसा कर की
बदल जाए सारी रितिया
ओ वुमनिया
चल बदलें दुनिया
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