Tuesday, 21 April 2020

मैं औरत हूँ

मैं औरत हूँ
देखो ना
मैं शरीर भी हूँ
हाँ मैं औरत हूँ...
मैं इंसान नहीं
मुझमें प्राण नहीं
मैं नज़रों का
बस धोखा हूँ
मेरा कोई
अधिकार नहीं
कि अपने बारे में
सोच सकूँ
हर घर की
शोभा है मुझसे
हर नज़र में
मैं निलाम हूँ
क्योंकि शरीर हूँ
हाँ मैं औरत हूँ
अपनी पहचान
बना लूँ चाहे
दुनिया में नाम
कमा लूँ चाहे
आसमान की
ऊँची उड़ान भरके
सारा आसमान
नाप लूँ चाहे
पर देखने में
सिर्फ शरीर हूँ
क्योंकि औरत हूँ.
मेरी अपनी मर्जी
नहीं यहाँ
यहाँ काम बने
मेरा शरीर देखकर
पुरुषों की क्या
बात करें
औरत ने ही
खुद को शरीर
बनाया है
पुरुषों ने सदियों
से राज किया
ये औरतों को
क्यूँ न समझ
आया है
शायद इसीलिए
शरीर हूँ
हाँ मैं औरत हूँ
इन शरीरों में
मैं कौन हूँ
मेरा क्या
स्तित्व है
मेरी क्या
पहचान है
मेरी क्या
औकात है
मन कर दे
वो चाह हूँ मैं
जैसे कोई
सामान हूँ मैं
मन करदे
वो वाक्य है
औकात मेरी
बता दिया
कि मैं शरीर हूँ
मैं औरत हूँ....
हाँ मैं औरत हूँ
उफ् मन ही
करदे ना
ग़र मेरा भी
कर दे तो ?
मैं चरित्रहीन
हो जाऊँगी
और वैश्या
कहलाऊँगी
इज्जत जाएगी
खानदान की
बदनामी बड़ी
हो जाएगी
क्योंकि मैं
औरत हूँ ??...
हाँ मैं औरत हूँ
पुरुषों की नज़र में
मैं बस शरीर ही हूँ...
मैं कामकाजी हूँ
बस इसलिए नहीं
चारदिवारी में भी
मैं शरीर हूँ
अपनों की नज़र में
परायों की नज़र में भी
सिर्फ शरीर नहीं
स्त्रित्व को देखा
कोई संभाल रहा
कोई उघाड़ रहा
हर कोई मुझे बस
पछाड़ रहा
क्योंकि मैं स्त्री हूँ
मैं औरत हूँ
मैं ग्राह्यता हूँ
मैं जननी हूँ
नहीं मैं
सिर्फ शरीर हूँ.....

ओ वुमनिया

ओ वुमनिया
चल बदलें दुनिया
है गन्दगी दिमाक में कुछ
कुछ गन्दी है ये दुनिया
ओ वुमनिया
चल बदलें दुनिया

पहचान तेरी कुछ है नहीं
बस ज़िस्म का सामान है
बरसो बरस बीत गए
बस तेरी यही पहचान है
अब बस हुआ
तू भूल जा ए सारी बतिया
कुछ ऐसा कर की
बदल जाए सारी रितिया
ओ वुमनिया
चल बदलें दुनिया

कहने को ये दुनिया
कहती है तुझे मइया
जग जननी दुर्गा सी
होती है तेरी बतिया
बस बतिया से संतुष्ट ना हो
मान भी शक्तिशालिया
कुछ ऐसा कर की
बदल जाए सारी रितिया
ओ वुमनिया
चल बदलें दुनिया

तुमने भी अपनी शक्ति का
गलत लगा लिया अनुमान
नश्वरता पर तूने भी
कर लिया गुमान
पहचान खुद की असलियत
तोड़ दे सारी बेड़ियाँ
कुछ ऐसा कर की
बदल जाए सारी रितिया
ओ वुमनिया
चल बदलें दुनिया

पहचान तू कोई वस्तु नहीं
चाह नहीं कोई धातु नहीं
मन कर दे तुझे छूने का
ऐसी कोई तू मूर्ति नहीं
तुझमें भी चेतना है
ये समझा दे सारी बतिया
कुछ ऐसा कर की
बदल जाए सारी रितिया
ओ वुमनिया
चल बदलें दुनिया

औरत को औरत बनाएं
समझ को उसकी सुदृढ़ बनाएं
खुद ही खुद की दुश्मन न बने
ऐसा कोई संकल्प दिलाएं
ऐसा अगर हो जाए
तो बदल जाए सारी दुनिया
कुछ ऐसा कर की
बदल जाए सारी रितिया
ओ वुमनिया
चल बदलें दुनिया

बेड़ियाँ तो तूने फेक दी
सीख भी लो खुद को बचाना
दरिंदे यहाँ खुले घूम रहे
सीखती दुर्गा का रूप दिखाना
मेनका रम्भा जो बन बैठी
तो बनती महाकाली भी
जो रूप दिखाती यौवन का
तो करती भी संहार मर्दानी सी
पर तू कहाँ कमजोर हुई
क्यूँ दिखती नहीं मर्दनिया
अब तू कुछ ऐसा कर की
बदल जाए सारी रितिया
ओ वुमनिया
चल बदलें दुनिया 

दुर्दशा है ये

जब मन में लगे
कहीं गलत तो नहीं
जब सामने भयंकर
परिणाम दिखे
तो समझना चाहिए
दशा नहीं दुर्दशा है ये

Pahali mulaakat | Hindi Drama

  Pahali mulaakat   Laraka Laraki Location ek park Dress code   jeans Tshurt sari   Middle class   family hai jisaki lar...