Tuesday, 12 November 2019

तेरे नाम ज़िन्दगी

नाम था मेरा भी
अब गुमनाम हो गई।
एक ज़िन्दगी थी
वो भी तेरे नाम हो गई।।

लाख पहरे बिठाए थे
मैंने खुद पर
फिर भी न जानें मैं
कैसे बदनाम हो गई।।
एक ज़िन्दगी थी
वो भी तेरे नाम हो गई।।

हाल अपना मैं कैसे
बयान करूँ
कब दिन गुजरा
कब शाम हो गई।।
एक ज़िन्दगी थी
वो भी तेरे नाम हो गई।।

रोती रही रात भर
मैं तेरे लिए
तुझसे प्रीत क्या जुड़ी
कि ज़िन्दगी हराम हो गई।।
एक ज़िन्दगी थी
वो भी तेरे नाम हो गई।।

लोग कहते थे एक दिन
नाम रौशन करेगी
देख तेरी वजह से
मैं भी आम हो गई।।
एक ज़िन्दगी थी
वो भी तेरे नाम हो गई।।

तूने प्रेम में मुझको
जकड़ा कुछ इस तरह
ना चाहते हुए भी
मैं तेरी गुलाम हो गई।।
एक ज़िन्दगी थी
वो भी तेरे नाम हो गई।।

लकीरें तो थीं हाथ में
पर किस्मत में थी
अलग सोचा था खुद को
औ मैं भी आवाम हो गई।।
एक ज़िन्दगी थी
वो भी तेरे नाम हो गई।।

कभी ख्वाबों में आते हो

                          कभी ख्वाबों में आते हो

कभी ख्वाबों में आते हो
कभी यादों में आते हो
कि वो खुश्बू नहीं मैं
जिसे तुम भूल जाते हो।।

कोई दरिया समंदर है
कोई रास्ता भयंकर है
कोई कश्ती तूफां में फंसी
कहीं उठता बवंडर है
कि तुम कोई राह बनकर के
नज़र सजदे में आते हो।
कभी ख्वाबों में आते हो
कभी यादों में आते हो

कहीं गुमनाम है मंजिल
कहीं आसान है राहें
कहीं बिखरा घना जंगल
कहीं पसरी तेरी बाहें
कि तुम ही मेरी नइया का
खेवइया बन के आते हो
कभी ख्वाबों में आते हो
कभी यादों में आते हो

कि सूनी है मेरी राहें
चलना साथ है मिलकर
मेरी किस्मत की लकीरों से
जुड़ना साथ है दिलबर
कि सारे गम समझने को
मेरे दिलबर तुम आते हो
कभी ख्वाबों में आते हो
कभी यादों में आते हो

मुहब्बत की कसम लेलो
निभाउंगी साथ जनम जनम
ए दुनिया छोड़ दें चाहे
न छोडुंगी साथ तेरा सनम
कसम इतनी सी खानी है
मेरे बस बन के आते हो
कभी ख्वाबों में आते हो
कभी यादों में आते हो

हाथों में हाथ लेकर तेरा
चलेंगे साथ तेरे सदा
मेरे महबूब मेरी ज़िन्दगी
दिलोजान करदूँ तुझपे फ़िदा
सदा इन मेरे होठों पर
गीत तुम बन के आते हो
कभी ख्वाबों में आते हो
कभी यादों में आते हो

हमेशा याद आती हैं
तेरी बातें तेरी कस्में
मुझे तू भूल गया बेशक
मुझे है याद हर रस्में
कि जब तक जान है मुझमें
मेरीदुनिया बन के आते हो
कभी ख्वाबों में आते हो
कभी यादों में आते हो

भरोसा कर तो लूँ तुझ पर
कभी ग़र छोड़ जाओगे
मिलेगी राख भी ना मेरी
कि मुझे दफना न पाओगे
मुझे है यकीन तुझ पर कि
मेरे महबूब कहलाते हो
कभी ख्वाबों में आते हो
कभी यादों में आते हो

मेरी जो रूह में है बसा
कोई तू दर्द पुराना है
जो हो हर हाल में सच्चा
वही रिश्ता निभाना है
कि तुम से प्यार करने का
बहाने कई बतलाते हो
कभी ख्वाबों में आते हो
कभी यादों में आते हो

मेरी सूनी सी दुनिया का
कोई खूबसूरत तू चेहरा है
मैं तुझसे प्यार करती हूँ
देख मौसम सुनहरा है
कि चढ़ती रातजवानी की
कोई फ़रियाद लाते हो
कभी ख्वाबों में आते हो
कभी यादों में आते हो

मेरी छोटी सी दुनिया का
एक बेताज़ बादशा तू
तेरे बिन सख्शियत क्या मेरी
मेरी रूः का भी शहंशा तू
कि मेरी ज़िम्मेदारियाँ लेकर
सारे रिश्ते निभाते हो
कभी ख्वाबों में आते हो
कभी यादों में आते हो

जाउंगी कहाँ तुझे छोड़कर
जब दुनिया है मेरी तुम से
मेरे भगवान हो तुम ही
औ मेरी पहचान भी तुम से
कि हालेदिल मेरा सुन कर
सारे गमोदर्द बटाते हो
कभी ख्वाबों में आते हो
कभी यादों में आते हो

Wednesday, 6 November 2019

ये ज़िस्म भी वही छुए...

ये ज़िस्म भी वही छुए...


जिस गहराई से उसने मेरे दिल को छू लिया
चाहत बस यही के ये ज़िस्म भी वही छुए।
उसने जब से छुआ है, वो छुअन तो ना साज़ थी
जब छुआ था उसने अहसासों से, तब बंद मेरी आवाज थी
मन मेरा शांत एक भँवर था, अब उसमें तूफान है
कराह उठी थी शब्दों से, मैं भी कैसी नादान थी।
तो क्या जिस गहराई से उसने मेरे दिल को छू लिया
चाहत बस यही के ये ज़िस्म भी वही छुए।

ऐसा तो नहीं उसने छुआ और मैं मैली हो गई
हाँ स्वच्छ थी कोरी सी, थोड़ी सी मटमैली हो गई
हाथों की छुअन से ज्यादा थी, उसके अहसासों की छुअन
और उस छुअन के साथ जीना, मेरे जीवन की शैली हो गई
फिर भी जिस गहराई से उसने मेरे दिल को छू लिया
चाहत बस यही के ये ज़िस्म भी वही छुए।

यहाँ तो उम्र के भी फासले, और दूरियाँ भी हजार हैं
चाहती हूँ बस मैं उसे, वो मुझसे बेज़ार है
उसने तो बस लगाई, मेरा सुलग रहा संसार है
हर जगह से उसने ब्लॉक कर दिया, फिर कैसा पगला मेरा प्यार है
जीने का जब भी सोचूँ, लगे उसके बिना बेकार है
शायद बसा ली हो एक दुनिया, उसने अपनी खुशियों की
तो भी जिस गहराई से उसने मेरे दिल को छू लिया
चाहत बस यही के ये ज़िस्म भी वही छुए।

ऐसा नहीं मैं किसी और की तरफ देखती नहीं
ऐसा भी नहीं कोई पसंद ना आए
ऐसा नहीं किसी पर नज़रें ठहरती नहीं
ऐसा भी नहीं कोई मेरी सोच में आए ना
जब सोचने लगूँ तो उस सा कोई नज़र आए ना 
इसलिए जिस गहराई से उसने मेरे दिल को छू लिया
चाहत बस यही के ये ज़िस्म भी वही छुए।

मैं ऐसा नहीं कहती वो मेरे जीने का सहारा है
ऐसा भी नहीं कि मेरी आँखों का वो तारा है
ऐसा भी नहीं कि मैंने उसके लिए छोड़ा जग सारा है
ऐसा भी नहीं कि उस सा नहीं कोई प्यारा है
बस इतना ही कि कोई लगता नहीं हमारा है
तभी तो जिस गहराई से उसने मेरे दिल को छू लिया
चाहत बस यही के ये ज़िस्म भी वही छुए।

ऐसा नहीं कि मेरी चाहतें अब बदलती नहीं
ऐसा भी नहीं कि मैं अब सजती सँवरती नहीं
ऐसा नहीं कि बस रोती हूँ कभी हँसती नहीं
ऐसा भी नहीं कि मेरे दिल की धड़कनें अब बढ़ती नहीं
जब भी बढ़ती हैं धड़कनें तो याद आता है बस वो
इसलिए जिस गहराई से उसने मेरे दिल को छू लिया
चाहत बस यही के ये ज़िस्म भी वही छुए।

जिस गहराई से उसने छुआ है मुझे नहीं चाहती कोई और छुए
अहसासों से जज्बातों से मेरे दिल में कोई और घुसे
कोई पहरा तो नहीं लगाया है मैंने खुद पर फिर न जानें ए कैसा पहरा है
बस उसकी छुअन हो आखिरी कोई और न मुझको कभी छुए
प्राण हो मेरी शरीर में या निश्चेत हो मेरी सख्शियत
बस वही वो पुरुष हो जो मेरी अस्थियाँ भी चुने
हाँ मैं चाहती हूँ कि जिस गहराई से उसने मेरे दिल को छू लिया
चाहत बस यही के ये ज़िस्म भी वही छुए।।


मैंने तेरे नाम ज़िन्दगी की थी

मैंने तेरे नाम ज़िन्दगी की थी


मैंने की थी मोहब्बत
तूने दिल्लगी की थी
तूने खेल खेला था मेरे साथ
औ मैंने तेरे नाम ज़िन्दगी की थी।।

लोग प्यार करते है औ
एक दूजे के साथ रहते हैं
प्रियतम को छूकर उसके
होने का अहसास करते हैं।।
और मेरी किस्मत में न तू था
न तेरा साथ था,
थी तो मीलों की दूरी
औ बस तेरा अहसास था।।
इस अहसास के सहारे
मैंने बुने थे ढेर सारे सपने
सपने बुनते तेरे साथ ही बस
जीने की बंदगी की थी
तूने खेल खेला था मेरे साथ
औ मैंने तेरे नाम ज़िन्दगी की थी।।

जैसे मिला था मुझे तू
कोई किसी को मिला होगा क्या।
बस देखी थी एक तस्वीर तेरी
हार गई खुद को सोचा न एक पल जरा।।
जब पहली बार तुझसे बात हुई
हर मैसेज पर दिल की रफ्तार बढ़ी
मैंने खुद को कैसे कंट्रोल किया
और तुझको ना प्रपोज किया।
चाहत थी कि तू प्रपोज करे
ईश्वर से हर छण यही विनती की थी
तूने खेल खेला था मेरे साथ
औ मैंने तेरे नाम ज़िन्दगी की थी।।

औ जब प्रपोज किया तो यकीन न हुआ
डर लगा की कहीं तू कोई भँवर न हो
मैं डरती रही ना ना करती रही
छणिक समय का तू कोई प्रभावशाली ज़हर न हो
डर हार गया तू जीत गया
हमारे भी प्यार का एक किस्सा बना
आई हैव ब्वायफ्रेण्ड कहना अच्छा लगा
उस पल को तू सबसे सच्चा लगा
सम्भाले ना सम्भलती जो खुशी
उसका खुद से ही इजहार की थी
पर तूने खेल खेला था मेरे साथ
औ मैंने ए ज़िन्दगी तेरे नाम की थी।।

छणिक थी खुशी जो धूल मिट्टी हो गई
मेरे चेहरे की खुशी एक पल में फीकी हो गई
कि माँग तूने कुछ ऐसी की
कि चाहत मेरी कमजोर पड़ी
तेरी चाहत पूरी कैसे करती
दिमाग में संस्कारों की बेड़ी पड़ी
मैं मजबूर थी कितना जो तेरी
ख्वाहिश पूरी कर न सकी
औ तू भी निकला गजब का यार
और ब्रेकअप की धमकी देदी
मैंने तो तुझे हर शय में पाने की
उस खुदा से गुजारिश की थी
तूने खेल खेला था मेरे साथ
औ मैंने तेरे नाम ज़िन्दगी की थी।।

कहानी मेरी महीने भर की
प्यार मेरा कुछ छणों का था
अफसोस मुझे भी होता है
क्यों मैंने इस दलदल को चुना।
दुख ये नहीं कि तू छोड़ दिया
अफसोस तो बस उस वजह का है
क्या सच में इतनी अबोध हूँ मैं
या गलती मेरी लकीरों का है
अब जबकि तू चला गया फिर भी
बस तुझे ही पाने की ख्वाहिश की थी
तूने खेल खेला था मेरे साथ
औ मैंने तेरे नाम ज़िन्दगी की थी।।

तू गया ठीक है सब जाते हैं
प्रेम होता है तो ब्रेकअप भी होते हैं
पर तुमने जो घाव दिया
जो कभी किसी ने नहीं दिया
एक किस के लिए ब्रेकअप करके
मेरे सपनों का क्यूँ खून किया।
अब नफरत भी है औ तुझसे प्यार भी
तू क्या जाने की करती तेरा इंतजार भी
रातों ने कहा बेशर्म हो गई मुझे देखकर
रतजगा करती जैसे लुट गया संसार ही
जो भी हो पर तू है कि भूलता नहीं
सीने में दर्द बनके है कभी निकलता नहीं
रूठा था तू ए जानकर तुझे
मनाने की मैंने बहुत कोशिश की थी
तूने खेल खेला था मेरे साथ
औ मैंने तेरे नाम ज़िन्दगी की थी।।

दिन बीता महीनें बीते
अब साल बीतने वाला है
लाख जतन किए तुझे पाने का
जैसे तू मेरे जीने का सहारा है।
नम्बर मेरा ब्लॉक किया था
क्या बताऊँ की कैसे कैसे कॉल किया
झूठ बोलकर मोबाइल लिया
साथ में बैठी बस की लेडी से
राह चलते एक भिखारन मिली
झट कॉल किया मैंने तेजी से
ढूढा एक पीसीओ बूथ मिला
फिर झट से तुझे मैंने कॉल किया
जो भी किया वो प्यार न था
बस चाहत थी तुझे बुलाने की
जैसे मुझे तू छोड़ गया
ख्वहिश थी तुझे भी छोड़ जाने की
मंदिरों में मैंने फरियाद किया
मन्नत माँगी औ तुझे याद किया।
सब कुछ किया तुझे पाने को पर
ईश्वर ने भी कैसी मेरी आजमाइश की थी
तूने खेल खेला था मेरे साथ
औ मैंने तेरे नाम ज़िन्दगी की थी।
मैंने की थी मोहब्बत
तूने दिल्लगी की थी
तूने खेल खेला था मेरे साथ
औ मैंने तेरे नाम ज़िन्दगी की थी।।

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